छपरा

सारण लोकसभा में मतदान का प्रतिशत 56.49 रहा, शहरी क्षेत्र के मतदाताओं की तुलना में ग्रामीण क्षेत्र के मतदाताओं ने लिया बढ़ चढ़ कर हिस्सा

सारण लोकसभा में मतदान का प्रतिशत 56.49 रहा, शहरी क्षेत्र के मतदाताओं की तुलना में ग्रामीण क्षेत्र के मतदाताओं ने लिया बढ़ चढ़ कर हिस्सा

सारण : पांचवे चरण के तहत गत सोमवार को सारण संसदीय निर्वाचन क्षेत्र के मतदान कार्य सम्पन्न होने के बाद इस चुनाव मैदान में खड़े प्रत्याशियों द्वारा कुल 1711 मतदान केन्द्रों पर हुए मतदान को लेकर गुणा भाग का दौर जारी हो गया है। विभिन्न प्रत्याशियों के समर्थक और कार्यकर्ता अपने अपने उम्मीदवारों एवं उनके चुनाव अभिकर्ताओं को मतदान से सम्बंधित रिपोर्ट देने में जुट गये है। इस संसदीय क्षेत्र से मुख्य मुकाबला महागठबंधन के प्रत्याशी चन्द्रिका राय (राजद) एवं एनडीए के प्रत्याशी राजीव प्रताप रूडी (भाजपा) के बीच ही दिखी। थोड़ी बहुत कुछ निर्दलीय एवं दलीय प्रत्याशी भी कहीं कहीं घुमते नजर आये। भीषण गर्मी एवं तपती धूप के बीच मतदाताओें ने जिस तरीके से बढ चढ कर हिस्सा लिया वह काबिल तारीफ था। खास कर युवाओं एवं महिलाओं क उत्सुकता ज्यादा दिखी। प्रचंड गर्मी के बीच कई ऐेसे मतदान केन्द्र मिले जहां पंक्ति का क्रम टूटा हीं नही और देर संध्या तक मत गिरता रहा। वहीं परसा एवं दरियापुर सहित सोनपुर के नयागांव में कुछ छिटपुट घटनाओं को दरकिनार कर दिया जाय तो यह मतदान बिल्कुल ही शांतिपूर्ण वातावरण में सम्पन्न हुई है। हालांकि राजद प्रत्याशी के चुनाव अभिकर्ता द्वारा मतदान समाप्ति के दो घंटा पूर्व ही सोशल साइट के माध्यम से यह आरोप लगाया कि यह मतदान कार्य जिला प्रशासन की लूंज-पूंज व्यवस्था के बीच चुनाव सम्पन्न हुआ। जिसके अंतर्गत सैकड़ों ऐसे मतदान केन्द्रों की सूचना मिली जहां ईवीएम खराब दिखी। उधर जिला प्रशासन के पास शिकायतों की सूची जैसे जैसे मिलती गयी वैसे वैसे प्रशासन द्वारा शाॅर्ट आउट होता रहा। मतदान के प्रति जागरूक करने के लिए जिस तरीके से सारण के सभी प्रखंडों सहित जिला मुख्यालय में प्रशासन एवं स्वयं सेवी संस्थाओं द्वारा मतदाता जागरूकता अभियान चलाया गया उसका परिणाम यह हुआ कि विगत चुनाव की तुलना में इस बार के चुनाव में मतों का प्रतिशत करीब करीब तीन प्रतिशत अधिक बढा। मतों के प्रतिशत से जहां प्रशासन की उपलब्धि मानी जा रही है वहीं कुछ छिटपुट घटनाओं एवं ईवीएम खराबी की सूचना पर थोड़ी बहुत प्रशासन की व्यवस्था पर सवालिया निशान भी उठाया जा रहा है। हालांकि प्रशासन द्वारा भरपूर मुकम्मल व्यवस्था की गयी थी। सुरक्षा की व्यापक व्यवस्था प्रायः सभी मतदान केन्द्रों एवं चेकिंग स्थल सहित पेट्रोलिंग कार्य में की गयी थी, यहीं नहीं नदी तटीय स्थलों सहित अन्य स्थानों पर जहां घुड़सवार पुलिस की व्यवस्था की गयी थी वहीं नावों से भी पुलिस गश्त करायी जा रही थी। यहीं कारण है कि चुनाव के दौरान कोई भी असामाजिक तत्वों की दाल नहीं गली। जो भी मामले आये है सबका निष्पादन हुआ है। जिला प्रशासन के वरीय अधिकारियों जिला अधिकारी सुब्रत कुमार सेन एवं अपर समाहर्ता अरूण कुमार की उपस्थिति में मतदान प्रक्रिया समाप्ति के बाद प्रेक्षक ने मंगलवार को सभी कागजातों की संवीक्षा की तथा संवीक्षोपरांत पाया कि सारण संसदीय क्षेत्र का चुनाव का मतदान का प्रतिशत 56.49 है। जिला सूचना एवं जन संपर्क पदाधिकारी ज्ञानेश्वर प्रकाश ने बताया कि सारण संसदीय क्षेत्र के अंतर्गत 117-मढौरा विधान सभा क्षेत्र में 57.11 प्रतिशत, 118-छपरा विधान सभा क्षेत्र में 52.81 प्रतिशत, 119-गरखा(सुरक्षित) विधान सभा क्षेत्र में 57.54 प्रतिशत, 120-अमनौर विधान सभा क्षेत्र में 56.32 प्रतिशत, 121-परसा विधान सभा क्षेत्र में 56.87 प्रतिशत एवं 122-सोनपुर विधान सभा क्षेत्र में 58.77 प्रतिशत मतदान हुआ है। सबसे खास बात यह है कि सोनपुर के राजद विधायक प्रोफेसर रामानुज प्रसाद एवं भाजपा के प्रांतीय उपाध्यक्ष एवं पूर्व विधायक विनय कुमार सिंह के क्षेत्र में सबसे अधिक मतदान का प्रतिशत रहा है। जबकि भाजपा के प्रत्याशी राजीव प्रताप रूडी के गृह विधान सभा क्षेत्र अमनौर में उनके प्रतिद्वंदी राजद प्रत्याशी चन्द्रिका राय के गृह विधान सभा क्षेत्र परसा से कम मतदान प्रतिशत हुआ है। यानि अमनौर में जहां 56.32 प्रतिशत मतदान हुआ जबकि परसा में 56.87 प्रतिशत हुआ है। हालांकि, इन दो विधान सभा क्षेत्रों से अधिक मत गरखा एवं मढौरा विधान सभा क्षेत्र में पड़ा है। जहां मत प्रतिशत क्रमशः 57.54 एवं 57.81 है। सबसे आश्चर्य जनक तथ्य तो यह है कि जिला मुख्यालय छपरा विधान सभा क्षेत्र में सबसे कम मतदान हुआ है। जहां इस क्षेत्र के प्रतिनिधि भाजपा के विधायक डाॅ. सी एन गुप्ता है। यहां मात्र 52.81 प्रतिशत ही मतदान हुआ है। इस क्षेत्र से कम मतदान होने पर यह स्पष्ट कहा जा रहा है कि शहरी क्षेत्रों की तुलना में ग्रामीण क्षेत्रों के मतदाता मतदान के प्रति जागरूक दिखें। यदि चुनाव आयोग के स्पष्ट निर्देशों का पालन को ग्रामीण क्षेत्र के मतदाता नहीं करते तो मतदान का प्रतिशत विगत चुनाव की तुलना में इस बार बेहद कम होती। खैर, जो भी हो कुल मिलाकर सारण संसदीय क्षेत्र का मतदान प्रतिशत विगत चुनाव की तुलना में अधिक होने से प्रशासन से जुड़े अधिकारियों के अलावा चुनाव में खड़े उम्मीदवारों के कार्यकर्ता एवं समर्थकों में एक खुशी अवश्य देखी जा रही है। क्योंकि मेहनत तो कुछ रंग लाया।

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